Thursday, October 31, 2013

आखिर क्यों दुनिया भर की सरकारों और एजेंसियो की नजर इन मुसलमानों पर हमेशा रहती है !!


●इस्लाम का प्रमुख उद्देश्य सभी गैर मुस्लिमो को इस्लामी झंड़े और शरिया कानून के दायरे मे लाना है !

●अगर करोडो मुस्लिम सामान्य जीवन जीते हुये दर्जनों बच्चे पैदा करके अपनी जनसंख्या मे इजाफा कर रहे है और सारे सिस्टम को अपने काबू मे करते जा रहे है, तो ये अत्यंत गंभीर समस्या है !
इसी मकसद के लिए मुस्लिम लोग इस्लाम और शरिया के लिए व्यवस्था मे अपनी पैठ बनाते है

●मुसलमान अपने इस्लामी सिद्धांतो के सहारे "इस्लाम को बढाने के मकसद' के लिये 1400 सालो से..अब तक राजनीतिक धार्मिक और सांस्कृतिक इस्लामी साम्राज्यवाद के जरिए दूसरे
देशो की व्यवस्था के लिए गंभीर समस्या पैदा कर रहे है !

√उपाय - इनका आर्थिक और सामाजिक बहिस्कार

इतिहास गवाह है कि जिस भी देश में मुसलमान बहुसंख्यक हो गए वो देश आतंकवाद, जिहाद, दंगे, और बम धमाकों की भेंट चढ़ गया।



मुसलमान जब अल्पसंख्यक होते हैं तो भाई बनकर रहते हैं और बहुसंख्यक होते ही ये कसाई बन जाते हैं। इतिहास गवाह है कि जिस भी देश में मुसलमान बहुसंख्यक हो गए वो देश आतंकवाद, जिहाद, दंगे, और बम धमाकों की भेंट चढ़ गया। 
पाकिस्तान, बांग्लादेश, सऊदी अरब , इराक, अफगानिस्तान, सीरिया जैसे देश इसका जीता जागता उदहारण हैं। आज इन देशो में हिन्दू, बोद्ध, यहूदी धर्म समाप्त हो चुके हैं.....या तो उन्हें मार दिया गया या जबरन धर्म परिवर्तन करा दिया गया। और महिलाओ को बलात्कार के बाद यातनापूर्वक मार दिया गया। और यही स्थिति अगर हिंदुस्तान की रही तो यहाँ भी वही हालत हो जाएगी ...असम , कश्मीर और किश्तवाड़ में हम ये देख भी चुके हैं

मुसलमान क्यों लड़ते रहते हैं ?



मुसलमान किसी भी देश में रहें हमेशा फसाद करते रहते है , कई लोग इसका कारण राजनीतिक व्यवस्था और भ्रष्ट सरकारें बताते हैं , लेकिन असली कारण कुरान है , जो कहती है ...

وَأَعِدُّواْ لَهُم مَّا اسْتَطَعْتُم مِّن قُوَّةٍ وَمِن رِّبَاطِ الْخَيْلِ تُرْهِبُونَ بِهِ عَدْوَّ اللّهِ وَعَدُوَّكُمْ وَآخَرِينَ مِن دُونِهِمْ لاَ تَعْلَمُونَهُمُ اللّهُ يَعْلَمُهُمْ وَمَا تُنفِقُواْ مِن شَيْءٍ فِي سَبِيلِ اللّهِ يُوَفَّ إِلَيْكُمْ وَأَنتُمْ لاَ تُظْلَمُونَ. سورة الأنفال- Al-Anfâl -8:60
तुम आसपास के सभी लोगों से लड़ते रहो , चाहे तुम उनको जानते भी नहीं हो , और युद्ध के लिए सभी साधनों का प्रयोग करो .ताकि लोग भयभीत रहें .और लड़ाई के लिए तुम जो भी खर्चा करोगे अलह उसकी पूर्ति कर देगा , और अल्लाह अन्याय नहीं करता ” सूरा -अनफ़ाल 8 :60

लव जिहाद - पोस्ट 2



इस्लाम का अंतिम लक्ष्य एक दारुल – इस्लाम में पूरी दुनिया की को रूपांतरित करना है और इस लक्ष्य को पाने मे "लव जिहाद" को मुख्य हथियार के रूप में प्रयोग किया जा रहा है

वर्तमान लोकतांत्रिक सेटअप में, जनसांख्यिकीय शैली बदलकर या मुस्लिम आबादी द्वारा देशी जनसंख्या बढ़ाने के आधार पर एक दारुल- इस्लाम में बदला जा सकता है. यह जितनी जल्दी हो सके किया जाना चाहिए, और उनके गैर – मुस्लिम को मुस्लिम गर्भ में बदलने के की जरूरत है. प्रक्रिया दो आयामी लाभ है. सबसे पहले, यह मुस्लिम आबादी तेजी से और दूसरी प्रफुल्लित करने में मदद करता है.

मुसलमानों मे योजना बनाने में बुराई और षड़यंत्रपूर्ण या आपराधिक साजिश रचने में महान प्रतिभाएँ हैं. मान लीजिए कि एक हिंदू लड़की एक अकेली सड़क के माध्यम से गुजर रही है और तीन या चार मुस्लिम लड़के बैठे हुए हैं और उनमे से एक हिन्दू होने का नाटक करता है और बाकी के उस लड़की से छेड़छाड़ करते हैं तब वो नाटकी लड़का उस लड़की को बचाने का प्रयत्न करता हैं और बचा भी लेता है और इस घटना से उस लड़की के अंदर आकर्षण विकशित होना स्वाभाविक है और वे दोनों झूठे प्रेम मे फंस जाते हैं. जब लड़की पूरी तरह से फँस जाती है, तब वह उसे इस्लाम में परिवर्तित करने के लिए निकाह करता है. अहमदनगर महाराष्ट्र मे अकेले, लगभग 300 हिंदू लड़कियों फंसाया गया और इस विधि का उपयोग किया गया.

तो अंत मे अपनी हिन्दू माँ बहनों से निवेदन हैं की आप लोग हमेशा सतर्क रहें और ऊपर लिखी हुई बातों को पूरे ध्यान मे रखें

लव जिहाद - पोस्ट 1



लव जिहाद – हिन्दू लड़की को अपने नकली प्यार मे फंसा कर धर्मांतरित करना ही इस जिहाद का मूल उद्देश्य है
मुसलमानों के अनुसार किसी भी काफिर देश को मुस्लिम राष्ट्र बनाने के लिए सबसे जरुरी है वहां की जनसँख्या का संतुलन बिगाड़ना. इसी लक्ष्य को पूराकरने और अपनी आबादी जल्दी बढाने के लिए वे गैर मुस्लिम लड़कियों को शिकार बनाते हैं और फिर उन्हें इस्लाम में परिवर्तित कर देते हैं.

इस जनसांख्यिकीय युद्ध में मुस्लिम गर्भ सबसे शक्तिशाली हथियार के रूप में उभरा है. तो, इस्लाम में एक गैर – मुस्लिम महिला का रूपांतरण बस एक मुस्लिम गर्भ और अधिक जिहादियों को जन्म देने में किया जाता है

प्रेम जाल में अधिक से अधिक लड़कियों को फँसाने के अपने अभियान के अंतर्गत बाहर ले जाने के लिए विशेष रैंक, पुरस्कार, और पैसा दिया जाता है. , कोझीकोड लॉ कॉलेज में एक पूर्व छात्र जहांगीर रजाक ने 42 लड़कियों की अकेले ही फंसा लिया और उन सब को मिलाकर एक सेक्स रैकेट चलाने लगा.
अहमदनगर महाराष्ट्र मे अकेले, लगभग 300 हिंदू लड़कियों फंसाया गया और इस विधि का उपयोग किया गया.

चेन्नई मे सरकारी संस्थाओं को पता हैं की इस सेक्स रैकेट और आतंकवादी संगठनों के बीच कोई कड़ी है. सऊदी अरब से इस काम के लिए बहुत फंडिंग की जाती है.
.........................
तो अंत मे अपनी हिन्दू माँ बहनों से निवेदन हैं की आप लोग हमेशा सतर्क रहें और ऊपर लिखी हुई बातों को पूरे ध्यान मे रखें, और भाइयों को सलाह है की ऐसे जिहादियों को जहाँ देखें धुनाई शुरू कर दें..

Monday, October 28, 2013

अगर भारत को टूटने से बचाना है तो भारत को जल्द से जल्द हिन्दू देश घोषित करो

जब पाकिस्तान को इस्लामिक देश घोषित
किया गया तब ...पकिस्तान में 25 % हिन्दू थे ..।
क्या इन मुल्लो ने 25 % हिन्दुओ को पुछा ...की. तुम्हे
इस्लामिक देश चाहिए या सेक्युलर देश .....?
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जब बांग्लादेश को इस्लामिक देश घोषित
किया गया तब ...बांग्लादेश में 33 % % हिन्दू थे ..।
क्या इन मुल्लो ने 33 % हिन्दुओ को पुछा ...की. तुम्हे
इस्लामिक देश चाहिए या सेक्युलर देश .....?

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और आज भारत में ...18 % मुस्लिम है फिर हम क्यों इन जिहादी से पूछ रहे है की तुम्हे हिन्दू-देश चाहिए
या सेक्युलर देश ...?

अगर भारत को टूटने से बचाना है तो भारत को जल्द से
जल्द हिन्दू देश घोषित करो ।।।

[ इस पोस्ट शेयर करो या मन में याद करो और अपने
सेक्युलर दोस्तों को बताओ ...]

बकरा ईद

जिस इस्लामी खूनी त्योहार को लोग "अज्ञानवश बकरा ईद
या बकरीद" कहते हैं...... उसका असली नाम..... " ईदुल अजहा" है ...
जिसका अर्थ.... "क़त्ल करने की ख़ुशी" होती है ...!
जिसे थोड़ी बहुत भी उर्दू आती होगी.....उन्हेंये भली-भांति मालूम
होगा कि...... ""कुर्बानी का मतलब बलिदान"" होता है .... और,
""कुर्बानी देने का मतलब खुद मरना"" होता है..... ""ना कि...
दूसरों को मारना""......!
जबकि.... जिबह का अर्थ..... किसी के गले पर छुरी फेरना ..... और,
उसकी हत्या करना है....!
हकीकतन ये हरामी मुल्ले ...... कुर्बानी का नाम लेकर .... हम हिन्दुओं
की भावना को आहात करने और हमें नीचा दिखाने के लिए.... खुलेआम
गौ हत्या करते हैं....!
वास्तव में..... बकरा ईद या बकरीद का असली उद्देश्य.......
मुसलमानों को हत्या करने का प्रशिक्षण देना है ..... जिसके
तहत ......पहले वह निरीह मूक जानवरों को मारते हैं ..... फिर, अभ्यस्त
होकर इंसानों की हत्या करते है ...!
इसके लिए चालाक मुल्ले इब्राहीम नाम के एक
नबी की कहानी का हवाला देते हैं .....जिसने अपने लडके
की कुर्बानी की थी ....और, उसी की याद में यह बकरा ईद मनाई
जाती है ....!
यहाँ तक कि.... मुल्ले मुहम्मद को उसी इब्राहीम का वंशज बताते हैं....!
लेकिन आप यह जानकर हैरान हो जायेंगे कि...... यह सरासर झूठ है .....
क्योंकि, न तो इब्राहीम ने अपने लडके की कुर्बानी दी थी ....और,
ना ही मुहम्मद... किसी इब्राहीम का वंशज था .
दरअसल इब्राहीम एक झूठा ..... और निहायत
ही अन्धविश्वासी तथा व्यभिचारी व्यक्ति था.......जिसने
अपनी ही सगी बहन से सम्भोग किया था ...!
और, इसी तरह..... इब्राहीम के भतीजे..... लूत ने
भी अपनी सगी बेटियों के साथ सहवास करके बच्चे पैदा किये
थे .......और, मुहम्मद ने हिन्दुओं की आस्था पर चोट करने तथा उनके
दिल दुखाने के लिए गाय की कुर्बानी करने का आदेश दिया था ....!
और ... अगर..... मुल्लों की इब्राहीम और
कुर्बानी वाली बातों को एक क्षण के लिए मान भी लिया जाए
तो....... क्या कोई मुल्ला ये जबाब देगा कि.....
1 -जब यहूदी और ईसाई भी मुसलमानों की तरह इब्राहीम
द्वारा लडके की कुर्बानी की कहानी को मानते हैं ....तो, यहूदी और
ईसाई कुर्बानी क्यों नहीं करते .
2 - क्या इब्राहीम एक सदाचारी और सत्यवादी व्यक्ति था ????
3 - क्या इब्राहीम ने सचमुच ही अपने पुत्र
की कुर्बानी की थी ..क्योंकि ... इब्राहीम के तो दो लडके
थे ......इसहाक और इस्माइल ...... फिर, इब्राहीम ने
किसकी कुर्बानी करना चाही थी....????
4 -क्या मुहम्मद उसी इब्राहीम के बेटे का वंशज है ....????
6 -बाइबिल और कुरान में तो केवल एक "मेंढे (Ram )" की बात
कही है ..... फिर गाय की बात क्यों और कहाँ से आ गई .....????
7 -अपनी सगी बहन के साथ सहवास करने वाले नीच इब्राहीम पर
लानत क्यों नहीं की जानी चाहिए .?????
8. अगर सच में इब्राहीम ने अपने बेटे की कुर्बानी दी थी तो....
उसी का अनुकरण करते हुए ये मुल्ले भी गाय के बदले ..... अपने
सूअरों की तरह जन्मे 20 -25 बच्चों में दो चार
बच्चों की कुर्बानी क्यों नहीं दे देते हैं....????
दरअसल.... ये सब मुस्लिमों का ढोंग है.... और किसी ने
किसी की कुर्बानी नहीं दी थी थी..... तथा, ये बकरीद... हम हिदुओं
की भावना को आहात करने के लिए और, हमारा दिल दुखाने के लिए
मनाया जाता है...!!
और, ये नौटंकी तब तक... इसी तरह चलता रहेगा..... जबतक कि....
मुल्लों को उन्ही की भाषा में जबाब नहीं दिया जायेगा ...
जो भाषा उन्हें समझ आती है...!
जय महाकाल...!!!